किस्मत 🥀♦️

मनाया तो बहुत उन्हें
पर क्या कर सकते जब किस्मत में ही उनका रूठ जाना लिखा था
वरना साथ भीगे तो हम भी थे कई मर्तबा सावन की बरसातों में 
कमबख़्त किस्मत में ही करीब आना नहीं दूर जाना लिखा था 
ये दिल तो तब भी पत्थर था और अब भी है
शायद किस्मत में ही इस पत्थर का भी टूट जाना लिखा था 
हमारे हिस्से के फूल उजाड़ कर 
किसी गैर को गुलदस्ते तोहफे में दिए उन्होंने 
शायद रकीब के नसीब में पूरी कहानी 
और हमारी किस्मत में बस आधा फ़साना लिखा था 

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